एक परिचय


लेखकों के एक समूह को फिल्म और रंग- समीक्षक अजित राय ने मित्र मंडली कहकर संबोधित किया था| मंगलेश डबराल ने कविता के इस संस्थागत समूह का नाम लिखावट रखा, जिसकी स्थापना ६, जनवरी, १९८९ में हुई थी| लिखावट में पहला कविता पाठ रघुवीर सहाय का हुआ था| रघुवीर सहाय संरक्षक के रूप में रहे जब तक जीवित रहे| इसकी मित्र मंडली में १९८९ से ही रहते आ रहे हैं: अशोक चन्द्र, सुनील मिश्र, कृष्ण कुमार, राजीव वर्मा, अनीता श्रीवास्तव, अनिल कुमार, उमेश चतुर्वेदी, विभा मिश्र, मिथिलेश श्रीवास्तव| अनीता श्रीवास्तव संयोजिका हैं|

लिखावट की एक मित्र मंडली है जिसे लिखावट प्रबंधन समिति के रूप में भी देखा जा सकता है| यह प्रबंधन समिति कविता के प्रति समर्पित है और समकालीन कविता की इतनी जबरदस्त पक्षधर है कि वह हर कार्यक्रम को कविता के ख्याल से एक यादगार बनाने की हर संभव कोशिश करती है| 

लिखावट की मदद करने वालों की संख्या काफी बड़ी हो गयी है| तादाद बदता ही जा रहा है| लोग आते रहते हैं, जाते रहते हैं| कई लोग अपनी महत्वाकांक्षा के कारण कभी कभी लिखावट को नुकसान भी पहुँचाने लगते है| लेकिन लिखावट के प्रबंधक इतने मानवीय और समर्थ है कि तुरंत कठोर और ठोश कदम उठाते हैं| कविता को समर्पित प्रबंधन कि कार्य कुशलता से मैं विभोर हूँ|
लिखावट की व्यापकता, समर्थता, समावेशीपन, लोकव्यप्ति, लोकप्रियता अतुलनीय है| यदि आप लिखावट से जुड़ना चाहते/चाहती हैं तो इसकी मुख्या संयोजिका अनीता श्रीवास्तव से संपर्क कर सकते हैं| उनका फोन है ९८६८१७४८५८|

1 टिप्पणी:

  1. कवियों को लिखावट के माध्यम से जो साहित्यिक मंच प्रदान किया जा रहा है-उसके लिए प्रबंधन समिति के सभी सदस्य बधाई के पात्र है।

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